कावय प्रहतयोहगता जो हक पुस्तक में बदल गयी कावयाांचल साहहहययक सांस्था की सतत प्रययनशीलता के पररणाम स्वरूप ही 'कावयाश्व' का अवतरण हुआ । यहाां पर पुस्तक के बारे में कु छ हलखने से पूवव कावयश्वमेध प्रथम और हितीय की चचाव करना आवश्यक है ।
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